India’s AI Summit opening in New Delhi marred by long queues, confusion – Reuters

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India AI Summit: टेक्नोलॉजी के ‘महाकुंभ’ में मैनेजमेंट फेल? दिल्ली में लंबी कतारों और कन्फ्यूजन ने बिगाड़ा खेल

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नई दिल्ली: भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का ग्लोबल हब बनाने के सपने के साथ आज नई दिल्ली में बहुप्रतीक्षित ‘India AI Summit’ की शुरुआत हुई। लेकिन, जिस भविष्य की तकनीक और रफ़्तार की बात हम मंच से कर रहे थे, वेन्यू के बाहर का नज़ारा उससे बिल्कुल उलट था।

रॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, समिट के उद्घाटन के दौरान भारी अव्यवस्था, लंबी कतारें और कन्फ्यूजन का माहौल देखने को मिला, जिसने इस बड़े आयोजन की चमक को थोड़ा फीका कर दिया है।

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AI की बातें, लेकिन इंतजाम ‘पुराने जमाने’ के!

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यह विडंबना ही है कि जिस समिट का उद्देश्य दुनिया को यह दिखाना था कि भारत तकनीक में कितना आगे बढ़ चुका है, वहां एंट्री के लिए लोगों को घंटों जद्दोजहद करनी पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, रजिस्ट्रेशन डेस्क और सिक्योरिटी चेक पॉइंट्स पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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देश-विदेश से आए डेलिगेट्स, पत्रकार और टेक एक्सपर्ट्स को गर्मी और उमस के बीच लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ा। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि जहाँ हम ‘स्मार्ट मैनेजमेंट’ की बात करते हैं, वहां बेसिक क्राउड मैनेजमेंट भी नदारद था।

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क्यों वायरल हो रही है यह खबर? (Key Highlights)

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इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है। यूजर्स का कहना है कि अगर AI समिट में ही ‘इंटेलिजेंस’ का इस्तेमाल नहीं होगा, तो फिर कहाँ होगा? यहाँ मुख्य बिंदु दिए गए हैं:

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  • लंबी कतारें: एंट्री पास होने के बावजूद लोगों को अंदर जाने के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ा।
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  • कन्फ्यूजन: रॉयटर्स के मुताबिक, डेलिगेट्स को यह भी साफ़ नहीं था कि उन्हें किस गेट से जाना है या रजिस्ट्रेशन कहाँ वेरिफाई होगा।
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  • वैश्विक छवि पर असर: यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का समिट है, ऐसे में इस तरह की बदइंतजामी भारत की ‘टेक-सेवी’ इमेज पर सवाल खड़े करती है।
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  • वीआईपी मूवमेंट: सुरक्षा और वीआईपी प्रोटोकॉल के चलते आम डेलिगेट्स को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी।
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क्या यह एक ‘सीख’ है?

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भारत ‘IndiaAI Mission’ के तहत टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा दांव खेल रहा है। लेकिन, सिर्फ अच्छी टेक्नोलॉजी बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि बड़े आयोजनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए ‘ह्यूमन मैनेजमेंट’ भी उतना ही जरूरी है।

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अब देखना यह होगा कि समिट के बाकी दिनों में आयोजक इस अव्यवस्था को कैसे सुधारते हैं। क्या हम दुनिया को यह साबित कर पाएंगे कि हम न केवल कोड लिख सकते हैं, बल्कि कतारें भी मैनेज कर सकते हैं?

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(सोर्स: रॉयटर्स)

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आपकी राय: क्या आपको लगता है कि भारत में बड़े आयोजनों में हमेशा मैनेजमेंट की कमी रह जाती है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें।

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