Hosur vs Karnataka? Aequs’ Rs 4,000 crore Tamil Nadu move triggers political heat – Moneycontrol

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{“result”:”यहाँ एक वायरल हिंदी न्यूज़ आर्टिकल है, जिसे एक एक्सपर्ट रिपोर्टर के नजरिए से लिखा गया है। इसमें HTML टैग्स का उपयोग किया गया है:nn

Hosur vs Bengaluru: कर्नाटक को लगा बड़ा झटका! ₹4,000 करोड़ के निवेश के साथ तमिलनाडु ने मारी बाजी, मची सियासी खलबली

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चेन्नई/बेंगलुरु: दक्षिण भारत में ‘बिजनेस वॉर’ अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है। पड़ोसी राज्य कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच निवेश खींचने की जंग तेज हो गई है। इस जंग में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बड़ी बाजी मार ली है, जिससे कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आ गया है। कर्नाटक के बेलगावी स्थित प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी Aequs Group ने अब तमिलनाडु के होसुर में ₹4,000 करोड़ के भारी-भरकम निवेश का ऐलान किया है।

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यह खबर न केवल आर्थिक जगत के लिए बड़ी है, बल्कि इसने कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के लिए भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। आखिर क्यों एक कर्नाटक की कंपनी अपने ही राज्य को छोड़कर पड़ोसी राज्य में इतना बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा रही है? आइए जानते हैं पूरा मामला।

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क्या है पूरी डील? (The Big Deal)

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तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में दो बड़े समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो राज्य में औद्योगिक क्रांति लाने का दम रखते हैं। सबसे बड़ा झटका कर्नाटक को तब लगा जब Aequs Group ने होसुर (Hosur) में एक नया ‘एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पार्क’ बनाने की घोषणा की।

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  • Aequs का निवेश: कंपनी ₹4,000 करोड़ का निवेश करेगी, जिससे एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
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  • NMB-Minebea का निवेश: जापानी कंपनी NMB-Minebea India भी ₹1,980 करोड़ का निवेश कर रही है।
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  • रोजगार: इन दोनों प्रोजेक्ट्स से करीब 8,400 लोगों को सीधा रोजगार मिलने की उम्मीद है।
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होसुर बना बेंगलुरु का सबसे बड़ा सिरदर्द

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होसुर, जो भौगोलिक रूप से बेंगलुरु से सटा हुआ है, अब कर्नाटक की राजधानी के लिए सबसे बड़ा प्रतियोगी बनकर उभरा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तमिलनाडु सरकार होसुर को एक वैकल्पिक ‘टेक और मैन्युफैक्चरिंग हब’ के रूप में विकसित कर रही है। बेंगलुरु में ट्रैफिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की समस्याओं के बीच, होसुर बेहतर कनेक्टिविटी और सस्ती जमीन का लालच देकर कंपनियों को लुभा रहा है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, Aequs Group का हेडक्वार्टर कर्नाटक के बेलगावी में है। जब घर की कंपनी ही पड़ोसी राज्य में इतना बड़ा निवेश करे, तो सवाल उठना लाजमी है। इसे कर्नाटक के ‘एयरोस्पेस हब’ वाले टैग पर सीधा हमला माना जा रहा है।

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सियासी पारा क्यों चढ़ा? (Political Heat)

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इस डील के सामने आते ही कर्नाटक में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार निवेशकों का भरोसा खो रही है, जिसका सीधा फायदा तमिलनाडु उठा रहा है। वहीं, तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टी.आर.बी. राजा ने इसे राज्य की प्रगतिशील नीतियों की जीत बताया है।

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यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब कई मल्टीनेशनल कंपनियां ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत भारत में ठिकाना ढूंढ रही हैं। ऐसे में राज्यों के बीच की यह प्रतिस्पर्धा निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन कर्नाटक के लिए यह ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up call) है।

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निष्कर्ष (Expert Take)

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तमिलनाडु का यह कदम उसके ‘1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ के लक्ष्य की ओर एक ठोस कदम है। वहीं, कर्नाटक को अगर अपनी सिलिकॉन वैली और मैन्युफैक्चरिंग बादशाहत बचानी है, तो उसे बेंगलुरु से बाहर निकलकर टियर-2 शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को तुरंत सुधारना होगा। फिलहाल, स्कोर बोर्ड पर तमिलनाडु आगे दिखाई दे रहा है।

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