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{“result”:”ज़रूर, यहाँ एक वायरल न्यूज़ रिपोर्टर के अंदाज़ में इस बड़ी खबर पर आधारित हिंदी आर्टिकल है:nn
🇮🇳 भारत का ‘हॉन्ग-कॉन्ग’ बनने का रास्ता साफ! NGT ने दी 80,000 करोड़ के ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ को हरी झंडी
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नई दिल्ली: भारत के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम ‘ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना’ (Great Nicobar Island Project) को मंजूरी दे दी है। 80,000 करोड़ रुपये की इस महाकाय परियोजना के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को NGT ने खारिज कर दिया है। यह फैसला न सिर्फ भारत के बुनियादी ढांचे के लिए बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए भी एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है।
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क्यों अहम है NGT का यह फैसला?
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पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन NGT ने साफ कर दिया है कि इस मामले में अब ‘हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार’ (No good ground to interfere) नहीं बचा है। ट्रिब्यूनल ने माना कि यह प्रोजेक्ट देश के लिए ‘सामरिक’ (Strategic) रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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NGT की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) को चुनौती देने वाली याचिकाओं में अब कोई दम नहीं है, क्योंकि सरकार द्वारा गठित हाई-पावर कमेटी (HPC) ने प्रोजेक्ट की बारीकी से जांच की है और इसे सही पाया है।
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🔍 क्या है 80,000 करोड़ का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?
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यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि बंगाल की खाड़ी में भारत की ताकत का नया प्रतीक है। इसे भारत के ‘हॉन्ग-कॉन्ग’ या ‘सिंगापुर’ जैसा बड़ा हब बनाने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में मुख्य रूप से चार चीजें शामिल हैं:
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- 🚢 इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT): एक विशाल बंदरगाह जो ग्लोबल ट्रेड रूट पर भारत की पकड़ मजबूत करेगा।
- ✈️ इंटरनेशनल एयरपोर्ट: जो सैन्य और नागरिक दोनों तरह की उड़ानों के लिए इस्तेमाल होगा।
- ⚡ पावर प्लांट: 450 MVA का गैस और सौर आधारित बिजली संयंत्र।
- 🏙️ टाउनशिप: एक आधुनिक शहर का निर्माण।
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रक्षा और सुरक्षा के लिहाज से ‘मास्टरस्ट्रोक’
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विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह प्रोजेक्ट भारत के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेगा। ग्रेट निकोबार की लोकेशन मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के बेहद करीब है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट्स में से एक है। यहाँ अपनी मौजूदगी मजबूत करके भारत समंदर में अपनी धाक जमा सकेगा।
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पर्यावरण का भी रखा जाएगा ख्याल
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हालाँकि, पर्यावरणविदों ने वर्षावनों और जनजातीय क्षेत्रों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन NGT ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट को सख्त शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और वहां की मूल जनजातियों (Shompen and Nicobarese tribes) के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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निष्कर्ष: NGT की यह मंजूरी भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस सेक्टर के लिए एक मील का पत्थर है। अब देखना होगा कि 80,000 करोड़ का यह प्रोजेक्ट कितनी तेजी से जमीन पर उतरता है और हिंद महासागर में भारत की ताकत को कैसे नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।
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