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{“result”:”निश्चित रूप से, यहाँ दी गई खबरों के आधार पर एक ‘वायरल हिंदी न्यूज़ आर्टिकल’ तैयार है। मैंने इसमें एक एक्सपर्ट रिपोर्टर वाली टोन का इस्तेमाल किया है और फॉर्मेटिंग के लिए HTML टैग्स का प्रयोग किया है।nn***nn
गाजा पर ट्रंप का ‘मेगा प्लान’, लेकिन इजरायल ने अड़ा दी टांग! ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर क्यों भड़के नेतन्याहू?
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नई दिल्ली/यरुशलम: गाजा पट्टी (Gaza Strip) के भविष्य को लेकर अमेरिका और उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल के बीच एक बड़ी कूटनीतिक ‘जंग’ छिड़ गई है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण और निगरानी के लिए घोषित किए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) को लेकर इजरायल ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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एक तरफ जहाँ अमेरिका दुनिया के बड़े नेताओं को इस बोर्ड में शामिल कर रहा है, वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने साफ कर दिया है कि यह घोषणा उनकी सहमति के बिना की गई है। आइए जानते हैं आखिर पूरा मामला क्या है और क्यों इजरायल अमेरिका के इस फैसले से नाराज है।
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इजरायल को आखिर आपत्ति किस बात पर है?
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द हिंदू और टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने अमेरिका द्वारा उन नेताओं के नामों की घोषणा पर आपत्ति जताई है जो गाजा में अगले कदमों की निगरानी करेंगे। इजरायली पीएमओ (PMO) का कहना है कि:
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- इजरायल ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के विचार पर सहमति दी थी, लेकिन इसमें कौन शामिल होगा, इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई थी।
- इजरायल का कहना है कि अमेरिका ने समय से पहले ही नामों का ऐलान कर दिया।
- इजरायल चाहता है कि गाजा की सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े किसी भी बोर्ड में उसकी वीटो पावर (Veto Power) हो या कम से कम ऐसे देश शामिल न हों जो इजरायल के विरोधी माने जाते हैं।
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किन बड़े नेताओं को भेजा गया है न्योता?
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डोनाल्ड ट्रंप इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को एक ग्लोबल पावर ग्रुप बनाना चाहते हैं। अल जजीरा और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने निम्नलिखित नेताओं को इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है:
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- रजब तैयब एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan): तुर्किये के राष्ट्रपति।
- अब्देल फतह अल-सीसी (Abdel Fattah el-Sisi): मिस्र के राष्ट्रपति।
- किंग अब्दुल्ला II (King Abdullah II): जॉर्डन के राजा।
- अजय बंगा (Ajay Banga): वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष (भारतीय मूल के अमेरिकी बैंकर)।
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एर्दोगन के नाम पर सबसे ज्यादा विवाद
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विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन का नाम है। एर्दोगन ने गाजा युद्ध के दौरान इजरायल की खुलकर आलोचना की है और नेतन्याहू को ‘युद्ध अपराधी’ तक कहा है। ऐसे में इजरायल यह कतई नहीं चाहेगा कि गाजा के भविष्य का फैसला करने वाले बोर्ड में तुर्किये जैसा देश शामिल हो।
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भारतीय मूल के अजय बंगा की भी एंट्री
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NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल बोर्ड में वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट अजय बंगा को भी जगह दी गई है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि गाजा के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए वर्ल्ड बैंक की भूमिका अहम होगी। अजय बंगा का अनुभव इस क्षेत्र में स्थिरता लाने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन इजरायल फिलहाल राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर ज्यादा चिंतित है।
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निष्कर्ष: क्या शुरू होने से पहले ही फेल हो जाएगा प्लान?
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में अभी से ही अफरा-तफरी (Chaos) का माहौल है। इजरायल का यह ‘वीटो’ ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप इजरायल की आपत्तियों के बाद एर्दोगन जैसे नेताओं को लिस्ट से हटाते हैं, या फिर नेतन्याहू को झुकना पड़ेगा। फिलहाल, गाजा में शांति की राह अभी भी कांटों से भरी नजर आ रही है।
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