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Iran vs America: ट्रंप की ‘ग्रैंड एंट्री’! न्यूक्लियर डील पर दिया ऐसा बयान, जिससे हिल गया तेहरान
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वॉशिंगटन/जिनेवा: दुनिया की नजरें इस वक्त स्विट्जरलैंड के जिनेवा पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर ‘परमाणु बातचीत’ (Nuclear Talks) का दौर शुरू हो गया है। लेकिन इस गंभीर माहौल में अमेरिका के पूर्व (और आने वाले) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
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ट्रंप का बड़ा दावा: ‘मैं परोक्ष रूप से शामिल रहूंगा’
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जहां एक तरफ जो बाइडेन का प्रशासन ईरान के साथ बातचीत की मेज पर बैठा है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इस ‘गेम’ में वो बाहर नहीं बैठे हैं। The Hindu और NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के साथ चल रही इन वार्ताओं में “परोक्ष रूप से” (Indirectly) शामिल रहेंगे।
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ट्रंप के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं:
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- क्या ट्रंप अपनी ‘बैक-चैनल’ कूटनीति का इस्तेमाल करेंगे?
- क्या बाइडेन प्रशासन के फैसलों पर ट्रंप का कोई दबाव होगा?
- या फिर ट्रंप ईरान को यह संदेश देना चाहते हैं कि असली ‘डीलमेकर’ अभी भी वही हैं?
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जिनेवा में क्या पक रही है खिचड़ी?
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BBC की रिपोर्ट के अनुसार, जिनेवा में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच नई परमाणु वार्ता शुरू हो चुकी है। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में तनाव चरम पर है। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, और अमेरिका चाहता है कि तेहरान पर लगाम लगाई जाए।
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एक हाथ में ‘बातचीत’, दूसरे हाथ में ‘मिसाइल’: अमेरिका का डबल गेम
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असली खबर सिर्फ बातचीत की नहीं है, बल्कि उसके पीछे छिपी सैन्य तैयारियों की है। The New York Times और WION की रिपोर्ट्स ने एक डरावनी तस्वीर पेश की है। जहां एक तरफ जिनेवा में हाथ मिलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समंदर में जंगी जहाज तैनात किए जा रहे हैं।
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अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर एक नजर:
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- एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती: अमेरिकी अधिकारीयों ने पुष्टि की है कि वेनेजुएला की तरफ से एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (US Aircraft Carrier) को सीधे मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है।
- ईरान के रडार होंगे ‘अंधे’: WION की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पास ऐसे खतरनाक ‘Growler Jets’ (USS Gerald R. Ford और USS Abraham Lincoln पर तैनात) हैं, जो ‘इलेक्ट्रॉनिक ब्लैकआउट’ कर सकते हैं। यानी अगर जंग हुई, तो ये जेट्स ईरान के पूरे रडार नेटवर्क को जाम कर उसे अंधा बना सकते हैं।
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निष्कर्ष: ट्रंप की वापसी और युद्ध के बादल
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ट्रंप का यह कहना कि वे बातचीत में शामिल रहेंगे, ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। ट्रंप अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं और ईरान को यह डर सता रहा होगा कि अगर बातचीत फेल हुई, तो अमेरिका का अगला कदम बेहद आक्रामक हो सकता है।
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फिलहाल, दुनिया की सांसें थमी हुई हैं—क्या जिनेवा से शांति का रास्ता निकलेगा, या मिडिल ईस्ट में एक और युद्ध की चिंगारी भड़केगी?
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