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{“result”:”निश्चित रूप से, यहाँ दी गई खबर पर आधारित एक वायरल हिंदी न्यूज़ आर्टिकल है। मैंने इसे एक एक्सपर्ट रिपोर्टर के लहजे में लिखा है और आपकी आवश्यकता के अनुसार HTML टैग्स का उपयोग किया है।nn***nn
AI के खौफ पर Indian IT ka ‘Brahmastra’! जानिए कैसे TCS, Infosys और Wipro ने पलट दी बाजी?
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Artificial Intelligence (AI) की आंधी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। पिछले कुछ महीनों में यह चर्चा आम हो गई थी कि क्या AI भारतीय आईटी सेक्टर (Indian IT Sector) की ‘कोडिंग’ को खत्म कर देगा? शेयर बाजार में निवेशकों के लगभग 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए, क्योंकि डर यह था कि AI इंसानों की जगह ले लेगा। लेकिन रुकिए! तस्वीर का दूसरा पहलू अब सामने आ रहा है।
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भारतीय आईटी दिग्गजों – TCS, Infosys, Wipro और HCLTech ने हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय, AI के खिलाफ अपना ‘ब्रह्मास्त्र’ (Brahmastra) निकाल लिया है। आइए जानते हैं क्या है इनका मास्टरप्लान।
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Indian IT का ‘गेम चेंजिंग’ प्लान: सिर्फ डिफेंस नहीं, अब अटैक की बारी
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Moneycontrol और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियां अब केवल लागत बचाने (Cost Cutting) पर नहीं, बल्कि ‘वैल्यू क्रिएशन’ पर ध्यान दे रही हैं। उनका जवाब सीधा है – “अगर आप AI को हरा नहीं सकते, तो उसे अपना हथियार बना लो।”
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कंपनियों ने इस चुनौती से निपटने के लिए तीन प्रमुख रणनीतियां अपनाई हैं:
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- Reskilling Revolution (कौशल विकास): TCS और Infosys जैसी कंपनियां अपने लाखों कर्मचारियों को ‘Generative AI’ में ट्रेन कर रही हैं। वे अपने वर्कफोर्स को कोडर्स से बदलकर ‘AI आर्किटेक्ट्स’ बना रहे हैं।
- Global Partnerships: भारतीय कंपनियां अकेले नहीं लड़ रहीं। इन्होंने Nvidia, Microsoft और Google जैसी सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों के साथ हाथ मिला लिया है ताकि क्लाइंट्स को बेस्ट AI सॉल्यूशन्स दे सकें।
- AI-First Platforms: अब बात सिर्फ सर्विस की नहीं, प्रोडक्ट की है। कंपनियों ने अपने खुद के AI प्लेटफॉर्म्स लॉन्च कर दिए हैं।
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किस कंपनी ने क्या किया? (Company-wise Breakdown)
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इस जंग में हर कंपनी का अपना अलग दांव है:
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- TCS (Tata Consultancy Services): TCS ने अपने कर्मचारियों के बड़े हिस्से को AI में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। वे ‘AI Wisdom’ नाम के अपने प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं ताकि कोड जनरेशन को तेज और सटीक बनाया जा सके।
- Infosys: इंफोसिस ने ‘Topaz’ नाम से एक AI-first ऑफरिंग लॉन्च की है, जो बिजनेस को AI की मदद से और स्मार्ट बनाने का काम कर रही है।
- Wipro: विप्रो ने ‘ai360’ का ऐलान किया है और AI क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अगले तीन सालों में 1 बिलियन डॉलर (अरबों रुपये) के निवेश का वादा किया है।
- HCLTech: इन्होंने ‘AI Force’ के जरिए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफसाइकिल को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली है।
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क्या निवेशकों को डरना चाहिए या दांव लगाना चाहिए?
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बाजार के जानकारों का मानना है कि आईटी स्टॉक्स में आई गिरावट एक झटका जरूर थी, लेकिन यह अंत नहीं है। विश्लेषकों (Analysts) के अनुसार, भारतीय आईटी सेक्टर एक “ट्रांजिशन फेज” (बदलाव के दौर) से गुजर रहा है।
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जैसे 90 के दशक में Y2K समस्या ने भारतीय आईटी को खड़ा किया था, वैसे ही Generative AI इनके लिए अगला बड़ा मौका (Next Big Opportunity) बन सकता है। हालांकि, यह राह आसान नहीं होगी, लेकिन इन कंपनियों का ‘ब्रह्मास्त्र’ यानी उनका विशाल और स्किल्ड वर्कफोर्स ही अंत में गेम-चेंजर साबित होगा।
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निष्कर्ष: भारतीय आईटी ने बस को मिस नहीं किया है, बल्कि वे बस के इंजन को ही बदलने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले 1-2 साल यह तय करेंगे कि कौन सी कंपनी AI की रेस में ‘राजा’ बनकर उभरती है।
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